No: 2232/R-512/2024/नियम/चार Dated: Dec, 22 2025

राज्य शासन में कार्यरत कार्मिकों के पदों से संबंधित नियम/दिशा-निर्देश जारी करना, अस्थायी/स्थायी पद का अंतर समाप्त करना एवं कार्यभारित/आकस्मिकता स्थापना तथा स्थायीकर्मी के सभी पदों को सांख्येतर घोषित करना

राज्य शासन के विभिन्न विभागों में कार्यरत कार्मिकों की श्रेणियों तथा प्रभावशील नियमों/ दिशा-निर्देशों के संबंध में विभाग स्तर पर कठिनाईयां अनुभव की जाती रही हैं तथा उक्त अनुक्रम में विभिन्न स्तरों से निरंतर परामर्श भी चाहा जाता रहा है। कार्य सुविधा के दृष्टिगत उक्त अनुक्रम में निम्नानुसार कंडिका-2 में स्थिति स्पष्ट की जा रही है।

2.- प्रदेश के विभिन्न विभागों के अंतर्गत वर्तमान में विभिन्न श्रेणियों के कार्मिक कार्यरत हैं। मध्यप्रदेश मूलभूत नियम तथा राज्य शासन के अन्य सुसंगत नियमों / निर्देशों के अनुक्रम में भिन्न-भिन्न श्रेणी के कार्मिकों से संबंधित प्रावधान भी भिन्न भिन्न हैं। प्रदेश में कार्यरत कार्मिकों की प्रमुख श्रेणियां तथा उनके संबंध में राज्य शासन के नियम / दिशा-निर्देश निम्नानुसार वर्गीकृत किये जा सकते हैं।

2.1- स्थायी पद के विरुद्ध नियोजित - मध्यप्रदेश मूलभूत नियम 9 (22) के अनुसार स्थायी पद से तात्पर्य एक निश्चित दर के वेतन में, बिना किसी समय सीमा के स्वीकृत पद से है। स्थायी पदों का सृजन संबंधित विभाग की कार्य आवश्यकता के आधार पर मंत्रि-परिषद द्वारा लिये गये निर्णय के आधार पर किया जाता है। विभाग के सेवाभर्ती नियमों में उक्त पदों के संबंध में आवश्यक प्रावधान यथा पद का स्वरूप, पद हेतु निर्धारित अर्हता, पदोन्नति अथवा सीधी भर्ती से पदपूर्ति विषयक प्रावधान आदि उल्लेखित होते हैं । स्थायी पदों पर नियोजित कर्मचारियों पर राज्य शासन के सभी सुसंगत नियम / निर्देश प्रभावशील रहते हैं । उक्त श्रेणी के कार्मिकों हेतु राज्य शासन की क्रमोन्नति / समयमान योजना प्रभावशील है इसके अतिरिक्त दिनांक 01.01.2005 के पूर्व नियुक्तों के लिये पेंशन नियम 1976 के प्रावधान प्रभावशील हैं। दिनांक 01.01.2005 को अथवा इसके उपरांत नियुक्तों हेतु राष्ट्रीय पेंशन योजना (NPS) प्रभावशील है। इस श्रेणी के कार्मिकों का वेतन सामान्यतः उद्देश्य शीर्ष #11 (11-025 संविदा कर्मचारियों का पारिश्रमिक को छोड़कर) से आहरित होता है ।

2.2- अस्थायी पद के विरुद्ध नियोजित - मध्यप्रदेश मूलभूत नियम 9 (30) के अनुसार अस्थायी पद विभाग की आवश्यकता के दृष्टिगत सीमित समयावधि के अनुसार एक निश्चित वेतन दर पर स्वीकृत होते हैं । अस्थायी पदों का सृजन भी मंत्रि-परिषद द्वारा लिये गये निर्णय के आधार पर होता है । अस्थायी पदों को विभाग की आवश्यकता के अनुसार समय-समय पर राज्य शासन के नीतिगत निर्णय के अनुक्रम में स्थायी भी किया जाता रहा है। विभाग के सेवाभर्ती नियमों की अनुसूचियों में रिक्त पदों के संबंध में आवश्यक प्रावधान किया जाता है।

विभाग की आवश्यकता के दृष्टिगत निर्धारित समयावधि पूर्ण होने पर अस्थायी पदों की निरंतरता हेतु मंत्रि-परिषद स्तर से अनुमोदन आवश्यक है। उपरोक्त कंडिका 2.1 में उल्लेखित राज्य शासन के सभी नियम एवं निर्देश अस्थायी पदों के विरुद्ध कार्यरत कार्मिकों पर प्रभावशील होते हैं। इस श्रेणी के कार्मिकों का वेतन सामान्यतः उद्देश्य शीर्ष #11 (11-025 संविदा कर्मचारियों का पारिश्रमिक को छोड़कर) से आहरित होता है ।

2.3- कार्यभारित एवं आकस्मिकता स्थापना के विरुद्ध नियोजित कार्मिक- कार्यभारित स्थापना के अंतर्गत राज्य शासन के विभागों, प्रमुख रूप से निर्माण विभागों में स्वीकृत विभिन्न वृहद कार्यों/परियोजनाओं के अंतर्गत परियोजना अवधि के अंतर्गत स्वीकृत पद हैं। आकस्मिकता स्थापना से अभिप्रेत विभाग की आकस्मिक आवश्यकताओं के दृष्टिगत विशेष समयावधि हेतु नियुक्त व्यक्तियों से है। उक्त श्रेणी की स्थापना से संबंधित कार्मिक मध्यप्रदेश कार्यभारित तथा आकस्मिकता स्थापना से संबंधित सेवाभर्ती नियम तथा उक्त से संबंधित अन्य सुसंगत प्रावधानों से प्रशासित हैं । इस श्रेणी के कार्मिकों हेतु समयमान वेतनमान से संबंधित दिशा-निर्देश प्रभावशील हैं। कार्यभारित एवं आकस्मिकता निधि सेवा से वेतन पाने वाले कर्मचारियों की सेवाकाल में मृत्यु होने पर सामान्य प्रशासन विभाग के परिपत्र दिनांक 21 मार्च, 2017 के द्वारा दिनांक 31.08.2016 से अनुकम्पा नियुक्ति की पात्रता है। उक्त के पूर्व के प्रकरणों में अनुकम्पा अनुदान ही देय है। इस श्रेणी के कार्मिकों का वेतन सामान्यतः उद्देश्य शीर्ष # 19 से आहरित होता है ।

2.4 संविदा पद के विरुद्ध नियोजित कार्मिक संविदा पद के विरुद्ध- नियोजन से तात्पर्य राज्य शासन के विभागों में विशिष्ट कार्यों के निष्पादन के दृष्टिगत संविदा / अनुबंध के आधार पर निर्दिष्ट समयावधि हेतु नियोजित व्यक्ति से है। संविदा पदों के विरुद्ध कार्यरत कार्मिक सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा जारी दिशा-निर्देश दिनांक 22 जुलाई 2023 एवं राज्य शासन की अधिसूचना दिनांक 28 सितम्बर 2017 तथा दिनांक 25 मई 2018 से प्रशासित हैं। राज्य शासन के विभागों में कार्यरत इस श्रेणी के कार्मिकों का पारिश्रमिक सामान्यतः उद्देश्य शीर्ष # 11 के विस्तृत शीर्ष 025 से आहरित होता है ।

    राज्य शासन के विभिन्न विभागों के अंतर्गत विशिष्ट योजना (केन्द्र प्रवर्तित / केन्द्र क्षेत्रीय / राज्य योजना) के क्रियान्वयन हेतु गठित विशिष्ट संस्था / मिशन यथा राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM), राष्ट्रीय आयुष मिशन, आत्मा (ATMA), राष्ट्रीय उद्यानिकी मिशन, राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा मिशन, जल जीवन मिशन आदि में भी योजना की गाईड लाईन के प्रावधानों के अनुक्रम में संविदा के आधार पर व्यक्ति कार्यरत हैं। इन संविदा आधारित व्यक्तियों को योजना की गाईड लाईन के प्रावधान के अनुसार ही पारिश्रमिक एवं अन्य सुविधायें देय हैं ।

2.5 स्थायीकर्मी - मध्यप्रदेश शासन, सामान्य प्रशासन विभाग के परिपत्र क्रमांक एफ 5-1/2013 / 1/3 दिनांक 07 अक्टूबर 2016 द्वारा राज्य शासन द्वारा नियमितीकरण से वंचित दैनिक वेतनभोगियों जो दिनांक 16 मई 2007 को कार्यरत थे तथा दिनांक 01 सितम्बर 2016 को भी कार्यरत थे, को स्थायी कर्मी की श्रेणी में निर्धारित मान्य किया है । स्थायीकर्मियों हेतु राज्य शासन द्वारा परिपत्र में उल्लेखित शर्तों के अनुसार श्रेणीकरण (अकुशल / अर्द्धकुशल / कुशल) किया जाकर, वेतनमान स्वीकृत किया गया है। इस श्रेणी के कार्मिकों को सेवाकाल में मृत्यु / सेवानिवृत्ति की स्थिति में म.प्र. शासन, वित्त विभाग के परिपत्र दिनांक 27 अगस्त, 2018 के अनुसार उपदान (ग्रेच्यूटी) का भुगतान उपदान भुगतान अधिनियम 1972 के प्रावधानों के तहत किया जाता है । स्थायीकर्मियों की अधिवार्षिकी आयु अवकाश की पात्रता राष्ट्रीय पेंशन योजना में विकल्प प्रस्तुत किये जाने की सुविधा,

अनुशासनात्मक कार्यवाही तथा सेवा की समाप्ति के संबंध में सामान्य प्रशासन, विभाग द्वारा परिपत्र दिनांक 03 मई 2017 के द्वारा जारी दिशा- निर्देश प्रभावशील हैं। इस श्रेणी के कार्मिकों का पारिश्रमिक सामान्यतः उद्देश्य शीर्ष # 12 से आहरित होता है।

2.6 स्थायी वर्गीकृत कार्मिक - निर्माण विभागों में कार्यरत श्रमिकों को मध्यप्रदेश औद्योगिक नियोजन अधिनियम 1961 व नियम 1963 के अंतर्गत औद्योगिक श्रमिक मान्य करते हुये स्थायी वर्गीकृत किया गया है। उक्त श्रेणी के कार्मिकों को सर्वोच्च न्यायालय द्वारा निर्धारित नीति के अनुसार समकक्ष पद के वेतनमान के न्यूनतम के बराबर पारिश्रमिक देय है, इन्हें वार्षिक वेतनवृद्धि देय नहीं है । इस श्रेणी के कार्मिकों का पारिश्रमिक सामान्यतः उद्देश्य शीर्ष # 12 से आहरित होता है ।

2.7 निजी एजेंसी के माध्यम से ली जाने वाली सेवायें एवं व्यक्ति (आउटसोर्स (कार्मिक) - विभाग की कार्य आवश्यकता के दृष्टिगत विशिष्ट श्रेणी के कार्य हेतु सक्षम स्तर (वर्तमान में मध्यप्रदेश शासन, वित्त विभाग) से स्वीकृति प्राप्त कर निजी एजेंसी के माध्यम से सेवायें / व्यक्ति नियोजित किया जाता है । यह नियोजन आउटसोर्स की प्रक्रिया का नियोजन कहलाता है। आउटसोर्स के संबंध में निजी एजेंसी का चयन मध्यप्रदेश भण्डार क्रय एवं सेवा उपार्जन नियम 2015 (यथा संशोधित- 2022 ) के आधार पर किया जाता है। शर्तों का निर्धारण उभय पक्ष ( सेवा ग्राही एवं सेवा प्रदाता) द्वारा किये अनुबंध के आधार पर रहता है। आउटसोर्स पर व्यक्तियों को रखे जाने हेतु पद सृजन नहीं किया जाना है। इस श्रेणी के कार्मिकों का पारिश्रमिक सामान्यतः उद्देश्य शीर्ष # 31 से आहरित होता है ।

    कतिपय प्रकरणों में विभागों द्वारा आउटसोर्सिंग से व्यक्तियों की सेवायें प्राप्त किये जाने हेतु पदों का सृजन कराया गया है । वस्तुतः यह पद नहीं है। ऐसी स्वीकृतियां सिर्फ व्यक्तियों की संख्या की स्वीकृति ही है।

   किन्ही प्रकरणों में विभागों द्वारा उपर्युक्त कंडिका 2.1 एवं कंडिका 2.2 की श्रेणी के रिक्त पदों के विरुद्ध सीमित समय के लिये इन पदों के विरुद्ध आउटसोर्सिंग के व्यक्तियों को वित्त विभाग की सहमति से नियोजित किया गया है। चतुर्थ श्रेणी के पदों के विरुद्ध ऐसे नियोजन को छोड़कर अन्य सभी नियोजन मार्च 2027 के पूर्व समाप्त किये जाकर मध्यप्रदेश शासन, वित्त विभाग के परिपत्र क्रमांक 11- 03/2024/नियम/चार दिनांक 18.11.2024 के अधीन आवश्यकतानुसार पद की पूर्ति की जाये । आउटसोर्सिंग से व्यक्तियों की सेवाओं को मार्च 2027 के बाद भी निरंतर रखे जाने की परिस्थितियां होने पर उपरोक्त कंडिका 2.1 या कंडिका 2.2 की श्रेणी के पदों को समाप्त किये जायें।

2.8- विशिष्ट समयावधि हेतु कार्य पर लिये जाने वाले कार्मिक - वन विभाग तथा कुछ अन्य विभागों में विशिष्ट कार्य के दृष्टिगत विशिष्ट समयावधि हेतु कार्मिकों को नियोजन किया जाता है । इन कार्मिकों को श्रम विभाग द्वारा विभिन्न श्रेणियों हेतु निर्धारित दर पर मजदूरी का भुगतान किया जाता है । इस श्रेणी के कार्मिकों का पारिश्रमिक सामान्यतः उद्देश्य शीर्ष # 12 से आहरित होता है।

2.9- अंशकालिक रूप से नियोजित कार्मिक - राज्य शासन के विभिन्न विभागों में आवश्यकतानुसार साफ-सफाई, वाटर मेन - फर्राश, रसोईया (कुक), माली आदि से संबंधित अंशकालिक कार्यों हेतु भी कार्मिक कार्यरत हैं । इन कार्मिकों को राज्य शासन द्वारा समय-समय पर निर्धारित पारिश्रमिक का भुगतान किया जाता है । इस श्रेणी के कार्मिकों का पारिश्रमिक सामान्यतः उद्देश्य शीर्ष # 12 से आहरित होता है ।

2.10 - राज्य शासन द्वारा लिये गये नीतिगत निर्णय के अनुक्रम में विशिष्ट विभागों में योजना क्रियान्वय के दृष्टिगत विशिष्ट श्रेणी के व्यक्ति यथा स्कूल शिक्षा विभाग एवं जनजातीय कार्य विभाग अंतर्गत अतिथि शिक्षक, उच्च शिक्षा विभाग अंतर्गत अतिथि विद्वान, तकनीकी शिक्षा विभाग अंतर्गत अतिथि व्याख्याता, स्वास्थ्य विभाग अंतर्गत आशा / ऊषा कार्यकर्ता एवं सुपरवाईजर, ग्रामीण विकास विभाग अंतर्गत ग्राम रोजगार सहायक, महिला एवं बाल विकास अंतर्गत आंगनबाडी कार्यकर्ता एवं सुपरवाईजर, गृह विभाग अंतर्गत नगर सैनिक, राजस्व विभाग अंतर्गत कोटवार आदि भी निर्दिष्ट कार्य निष्पादित करते हैं। इस श्रेणी के व्यक्तियों को निष्पादित कार्य के विरुद्ध योजना के प्रावधानों के आधार पर मानदेय एवं अन्य सुविधायें देय है। इस श्रेणी के कार्मिकों का मानदेय सामान्यतः अनुदान मद ( उद्देश्य शीर्ष #42 ) से आहरित होता है ।

3. यह अनुभव किया जा रहा है कि सीमित अवधि की विशिष्ट परियोजनाओं के अतिरिक्त अन्य विभागों में स्थायी एवं अस्थायी पदों की पात्रताओं में बहुत अधिक अंतर नहीं रह गया है। पदों से संबंधित सेवा शर्तें तथा सेवानिवृत्ति उपरांत देय सुविधाओं में भी भिन्नता की स्थिति कालान्तर में समाप्त हो चुकी है, अन्य पात्रतायें भी प्राय: समान हैं। उक्त तथ्य के दृष्टिगत वर्तमान में प्रचलित स्थायी एवं अस्थायी पदों का विभेदीकरण को समाप्त किया जाता है। पूर्व से प्रचलित अस्थायी पदों को स्थायी पदों में परिवर्तित करने हेतु सेवाभर्ती नियमों में आवश्यक प्रावधान किया जाये ।

4. निर्माण विभागों में वृहद कार्यों / परियोजनाओं आदि का क्रियान्वयन वर्तमान में निविदा के आधार पर किया जाता है, उक्त के दृष्टिगत कार्यभारित एवं आकस्मिकता स्थापना के अंतर्गत अब पदों की आवश्यकता नहीं है । कार्यभारित एवं आकस्मिकता स्थापना के सभी पदों को सांख्येतर घोषित किया जाता है । कार्यभारित एवं आकस्मिकता निधि के अंतर्गत अब नवीन नियुक्ति नहीं की जाये, साथ ही सामान्य प्रशासन विभाग के दिशा-निर्देशों के अनुक्रम में यदि अनुकम्पा नियुक्ति दी जाना है, तो वह उक्त से संबंधित नियम / निर्देश के अनुसार रिक्त नियमित पद के विरुद्ध दी जाये।

5. उपरोक्त कंडिका 2.5 एवं 2.6 पर वर्णित श्रेणी के सभी कार्मिकों को सांख्येतर घोषित करते हुये भविष्य में उनके स्थान पर अन्य को कार्य पर नियोजित नहीं कराया जाये ।

6. विभागीय आवश्यकताओं के अनुरूप भविष्य में सिर्फ कंडिका 2.1 एवं कंडिका-2.4 की श्रेणी के पदों का ही सृजन किया जाये । इसके अलावा कार्मिकों का नवीन नियोजन कंडिका- 2.7 कंडिका- 2.8 अथवा कंडिका-2.9 की श्रेणी में ही किया जाये ।

7. उपरोक्तानुसार दिशा-निर्देश जारी होने के उपरांत मध्यप्रदेश शासकीय सेवक (अस्थायी तथा अर्धस्थायी) नियम 1960 एवं वित्त विभाग द्वारा अस्थायी पदों की निरंतरता के संबंध में समय-समय पर जारी दिशा-निर्देश स्वतः निरसित मान्य होंगे ।

8. उपरोक्तानुसार दिशा-निर्देश मंत्रि-परिषद के आदेश आयटम क्रमांक 14 दिनांक 16 दिसम्बर 2025 में लिये गये निर्णय के अनुक्रम में जारी किये जा रहे हैं।

9.उपरोक्तानुसार दिशा-निर्देश की प्रभावशीलता जारी होने की दिनांक से मान्य होगी।

 

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