Posted on 02 Jun, 2026 8:09 pm

वन और वन्य प्राणियों की सुरक्षा एवं संरक्षण को अधिक प्रभावी बनाने के उद्देश्य से वन विभाग ने ‘गुप्तचर ऐप’ विकसित किया है। ‘गुप्तचर ऐप’ से स्थानीय नागरिक स्वयं को ‘गुप्तचर’ के रूप में पंजीकृत कर वन संरक्षण अभियान का हिस्सा बन सकते हैं। ऐप की पंजीकरण प्रक्रिया सरल, सहज और यूजर फ्रैंडली बनाई गई है। इससे अधिक से अधिक ग्रामीण ऐप से आसानी से जुड़ सकेंगे। पंजीकरण के साथ ही प्रत्येक उपयोगकर्ता को एक विशिष्ट गुप्तचर आईडी प्रदान की जाती है, जिससे उसकी पहचान पूर्णतः गोपनीय बनी रहती है। ‘गुप्तचर ऐप’ एक प्रभावी, पारदर्शी और सहभागी तंत्र के रूप में वन संरक्षण के प्रयासों को मजबूत करेगा तथा प्राकृतिक संसाधनों की सुरक्षा में स्थानीय समुदाय की भूमिका को और अधिक सुदृढ़ बनाएगा।

यह ऐप विशेष रूप से दक्षिण सिवनी वनमंडल के अंतर्गत वन क्षेत्रों के आसपास निवास करने वाले ग्रामीणों की वन सुरक्षा में सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए तैयार किया गया है।

वन संरक्षण के इस जन-अभियान से जुड़ने के लिए गुप्तचर ऐप लिंक https://play.google.com/store/apps/details?id=com.ginfosoft.guptchar से डाउनलोड किया जा सकता है।

ऐप के माध्यम से पंजीकृत गुप्तचर वन अपराधों से संबंधित सूचनाएं तत्काल वन विभाग तक पहुंचा सकते हैं। रिपोर्टिंग प्रक्रिया को आसान और प्रभावी बनाने के लिए ऐप में एक सुव्यवस्थित ड्रॉप-डाउन सूची उपलब्ध कराई गई है, जिसमें अवैध वृक्ष कटाई, वन्यजीव शिकार, अतिक्रमण, आगजनी और अन्य वन अपराधों की श्रेणियां शामिल हैं। इससे प्राप्त सूचनाओं पर त्वरित और सटीक कार्रवाई सुनिश्चित की जा सकेगी।

ऐप में वन विभाग के अधिकारियों, रेंज अधिकारी (आरओ) से वनमंडलाधिकारी (डीएफओ) तक के संपर्क नंबर भी उपलब्ध कराए गए हैं। आवश्यकता पड़ने पर उपयोगकर्ता सीधे संबंधित अधिकारी से संपर्क कर वन अपराधों की जानकारी साझा कर सकते हैं। इससे सूचना संप्रेषण और कार्रवाई की प्रक्रिया और अधिक प्रभावी बनेगी।

गुप्तचर ऐप की एक विशेषता यह भी है कि वन विभाग के अधिकारी परिक्षेत्रवार एवं बीटवार पंजीकृत गुप्तचरों से उनके पंजीकृत मोबाइल नंबरों पर सीधे संवाद स्थापित कर सकते हैं तथा वन सुरक्षा और संरक्षण से जुड़े विषयों पर चर्चा कर सकते हैं। इससे स्थानीय समुदाय और वन विभाग के बीच बेहतर समन्वय स्थापित होगा।

यह ऐप वन अपराधों के निगरानी तंत्र को सशक्त बनाएगा, साथ ही जन-सहभागिता आधारित वन संरक्षण मॉडल को नई दिशा भी देगा।

साभार – जनसम्पर्क विभाग मध्यप्रदेश

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