Continuation of Umbrella scheme for "Family Welfare and Other Health Interventions" during 2017-18 to 2019-20

 

No: --- Dated: Jan, 02 2019

                     कैबिनेट ने वर्ष 2017-18 से वर्ष 2019-20 के दौरान ‘परिवार कल्याण एवं स्वास्थ्य संबंधी अन्य उपायों के लिए समग्र योजना’ को जारी रखने की स्वीकृति दी

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में आर्थिक मामलों पर कैबिनेट समिति (सीसीईए) ने 14वें वित्त आयोग की वर्ष 2017-18 से लेकर वर्ष 2019-20 तक की अवधि के दौरान ‘परिवार कल्याण एवं स्वास्थ्य संबंधी अन्य उपायों के लिए समग्र योजना’ में 5 योजनाओं को जारी रखने की स्वीकृति दे दी है।

व्ययः

      14वें वित्त आयोग की वर्ष 2017-18 से लेकर वर्ष 2019-20 तक की अवधि के दौरान इस योजना के लिए कुल मिलाकर 2381.84 करोड़ रुपये की राशि व्यय की जाएगी और इसका शत-प्रतिशत वित्त पोषण केन्द्र सरकार की बजटीय सहायता के जरिए किया जाएगा।

लाभः

      गर्भ-निरोधकों के सामाजिक विपणन और गर्भ-निरोधकों की निःशुल्क आपूर्ति जैसे घटकों को विशेष रूप से निम्न आय वाले समूह में शामिल लोगों पर लक्षित किया जाता है। हालांकि, कुल मिलाकर यह योजना किसी विशेष समूह या श्रेणी तक ही सीमित नहीं है और इसमें पूरे देश की आबादी को कवर करने का प्रावधान है।

असरः

      प्रस्ताव में शामिल 5 योजनाएं राष्ट्रीय स्वास्थ्य नीति (एनएचपी) 2017 और सतत विकास लक्ष्यों (एसडीजी) के रूप में व्यक्त की गई अंतर्राष्ट्रीय प्रतिबद्धताओं में निहित लक्ष्यों और उद्देश्यों को प्राप्त करने की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण हैं।एसएनए योजना में जागरूकता बढ़ाने के साथ-साथ स्वास्थ्य सेवाओं की ज्यादा उपलब्धता के जरिए स्वास्थ्यसेवाओं की मांगकरने संबंधी लोगों के व्यवहार में बेहतरी लाने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य रखा गया है। एचएसएचआर के रूप में अन्य घटकों से भारत सरकार द्वारा संचालित किए जा रहे समस्त स्वास्थ्य कार्यक्रमों/योजनाओं की प्रगति पर करीबी नजर रखने में मदद मिलेगी। इससे समय पर इनमें आवश्यक सुधार करने में सहायता मिलेगी। गर्भ-निरोधकों के निःशुल्क वितरण एवं सामाजिक विपणन से आबादी में स्थिरता लाने के अलावा शिशुओं एवं माताओं का बेहतर स्वास्थ्य सुनिश्चित करना भी संभव हो पाएगा।

कार्यान्वयन रणनीति एवं लक्ष्य

      इसके तहत मुख्य उद्देश्य राष्ट्रीय स्वास्थ्य नीति 2017 के महत्वपूर्ण लक्ष्यों के साथ-साथ उन सतत विकास लक्ष्यों (एसडीजी) को भी अपनी ओर से आवश्यक सहयोग प्रदान करना है, जिन पर हस्ताक्षर करने वाले देशों में भारत भी शामिल है। मीडिया/आईईसी संपर्क के जरिए किए जाने वाले प्रयास का उद्देश्य बीमार लोगों की देखभाल से भी कहीं आगे बढ़कर आरोग्य (वेलनेस) की अवधारणा की ओर अग्रसर होना है, जिसके लिए पारम्परिक एवं सोशल मीडिया से जुड़े समस्त साधनों का उपयोग किया जाएगा। गर्भ-निरोधकों के निःशुल्क वितरण एवं सामाजिक विपणन का लक्ष्य आधुनिक गर्भ-निरोधक प्रसार दर (एमसीपीआर) को बेहतर करना, परिवार नियोजन में मदद करना और आबादी में स्थिरतासुनिश्चित करना है। एनएफएचएस का लक्ष्य स्वास्थ्य संबंधी सभी संकेतकों से जुड़े विश्वसनीय आंकड़े उपलब्ध कराना है।

      सभी पांचों योजनाएं दरअसल केन्द्रीय क्षेत्र की योजनाएं हैं, जिनके लिए शत—प्रतिशत वित्त पोषण केन्द्र सरकार द्वारा किया जाता है। ये निम्नलिखित हैः

ए.    स्वस्थ नागरिक अभियान (एसएनए):इसका उद्देश्यभारत के सभी उम्र के लोगों/महिलाओं-पुरुषों/समस्त स्थानों पर रहने वाले लोगों के बीच जागरूकता बढ़ाने के लिए स्वास्थ्य संबंधी मुद्दों से जुड़ी जानकारियों का प्रचार-प्रसार करने के साथ-साथ बेहतर जीवनशैली को बढ़ावा देना और नागरिकों का सशक्तिकरण करना है। तीन वर्षों के लिए 1030.15 करोड़ रुपये के अनुमानित परिव्यय के साथ एसएनए को मंजूरी दी गई है।

बी.    गर्भ-निरोधकों की निःशुल्क आपूर्ति:इसका उद्देश्य राज्यों कोकंडोम, गर्भ-निरोधक गोलियों,गर्भावस्था परीक्षण किट सहित अन्य गर्भ-निरोधकों की निःशुल्क आपूर्ति करना है, ताकि माताओं एवं शिशुओं का स्वास्थ्य बेहतर किया जा सके और इसके साथ ही आबादी में स्थिरता भी लाई जा सके।

सी.   एमआईएस योजना का नाम अब स्वास्थ्य सर्वेक्षण एवं स्वास्थ्य अनुसंधान (एचएसएचआर) रखने का प्रस्ताव:इसका उद्देश्य भारत और इसके राज्यों के लिए आबादी, स्वास्थ्य एवं पोषण से संबंधित आंकड़ों को प्राप्त करना है। समय-समय पर राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण (एनएफएचएस) करके भी इन आंकड़ों को हासिल किया जाएगा, जो विश्व भर में अपनी तरह के सबसे बड़े सर्वेक्षणों में से एक है। एनएफएचएस जिला स्तर तक नीति एवं कार्यक्रमों के लिए महत्वपूर्ण आंकड़े मुहैया कराता है।

डी.    गर्भ-निरोधकों का सामाजिक विपणन:इसका उद्देश्य किफायती मूल्यों पर निम्न आय वाले समूहों के लिए परिवार नियोजन से संबंधित उत्पादों एवं सेवाओं की ब्रांडिंग, आकर्षक पैकेजिंग, विपणन एवं बिक्री करना है।

ई.    जनसंख्या अनुसंधान केन्द्र (पीआरसी):इसका उद्देश्य पीआरसी, विशेषकर उन केन्द्रों से जुड़ी योजना का किसी तीसरे पक्ष (थर्ड पार्टी) द्वारा आकलन कराना है, जिन्हें आगे भी जारी रखने पर विचार किया जा रहा है। 

 

The Cabinet Committee on Economic Affairs, chaired by the Prime Minister Shri Narendra Modi, has given its approval for continuation of five schemes under the "Umbrella Scheme for Family Welfare and Other Health Interventions" during the Fourteenth Finance Commission period 2017-18 to 2019-20.

 

Expenditure:

An overall outlay of Rs. 2381.84 crore for the scheme will be spent during the Fourteenth Finance Commission period 2017-18 to 2019-20 and would be funded 100% by Central Government Budgetary support.

 

Benefits:

Components of, Social Marketing of Contraceptives, Free Supply of Contraceptives are specifically targeted towards low-income group people. However, the overall scheme is not restricted to any particular group or category and has the mandate to cover the population throughout India.

 

Impact:

The five schemes listed in the proposal are crucial to attaining the goals and objectives laid out in National Health Policy (NHP) 2017, and international commitments in the form of Sustainable Development Goals (SDGs). The SNA scheme has a very ambitious target of improving health-seeking behaviour of the population through increased awareness and enhanced uptake of health services. The other components as HSHR would assist in keeping a tab on the progress of the entire set of health programmes/schemes run by the Government of India, assisting in timely course corrections. The free and social marketing of contraceptives will enable better child and mother health, besides population stabilisation.

 

Implementation strategy and targets:

The target is to support the key goals of the National Health Policy 2017 and the Sustainable Development Goals (SDGs) to which India is a signatory. The attempt through Media / IEC outreach is to move from care for sickness to the concept of wellness by using 360-degree approach in conventional and social media. The target of the free distribution and social marketing of contraceptives is to improve the Modern Contraceptive Prevalence Rate (mCPR), help Family Planning and reach population stabilization. The target for NFHS is to provide reliable data on all health indicators.

 

All the five schemes are Central Sector Schemes with 100% funding from Central Government.  These are as follows:

a. SwasthaNagrikAbhiyan(SNA): For dissemination of information on health issues to create awareness among citizens of India of all age/sex/locations and appropriately influence their health-seeking behaviour to encourage healthy lifestyles and empower the citizens. SNA has been approved, with an estimated outlay of Rs. 1030.15 crore for three years.

b.  Free Supply of Contraceptives: For providing a free supply of contraceptives including condoms,  Oral    Contraceptive    Pills,    Pregnancy    Test    Kits,    other contraceptives, etc. to States with a view to improving Maternal and Child Health and achieving population stabilization.

c.   MIS Scheme now proposed as Health Surveys and Health Research (HSHR): For sourcing of data on population, health and nutrition for India and its States including through periodically conducted National Family Health Survey, which is one of the largest surveys of its kind worldwide. The NFHS provides valuable data for policy and programmes right up to the district level.

d.   Social Marketing of Contraceptives: For branding, attractively packaging, marketing arid selling of products and services related to Family Planning for low-income groups at affordable prices.

e.   Population Research Centres (PRCs): For third-party evaluation of the scheme on PRCs and especially of those centres which are being considered for continuation will be carried out.

Courtesy – Press Information Bureau, Government of India​​​