Revisions/modifications in National Programme for Mid-Day Meal in Schools

 

No: --- Dated: Feb, 19 2019

                   

 मंत्रिमंडल ने स्‍कूलों में मिड-डे-मील के लिए राष्‍ट्रीय कार्यक्रम में संशोधनों / परिवर्तनों के लिए अपनी मंजूरी दी

 

प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी की अध्‍यक्षता में मंत्रिमंडल की आर्थिक मामलों की समिति ने वर्ष 2019-20 के लिए खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण विभाग द्वारा वहन की जाने वाली 8,000 करोड़ की सब्सिडी सहित 12,054 करोड़ रूपये के परिव्‍यय के साथ मिड-डे-मील योजना के तहत मानदंडों को संशोधित करने के लिए मंजूरी दी है। निम्‍नलिखित संशोधित मानदंड और नए घटकों के समावेश से योजना की निपुणता और प्रभाविता में सुधार आयेगा।

मुद्रास्‍फीति सूचकांक से सम्‍बद्ध कुकिंग लागत में वार्षिक बढ़ोतरी - इस वर्ष कुकिंग लागत बढ़कर 4.35 रूपये और 6.51 रूपये प्रति बच्‍चा प्रति स्‍कूल हो गई है। इस प्रकार कुकिंग लागत में 361 करोड़ रूपये की बढ़ोतरी की गई है। यह मिड-डे-मील योजना के तहत खाद्य वस्‍तुओं पर मुद्रास्‍फीति के प्रभाव को दूर करेगी।

 

पीडीएस दर में पूर्वोत्‍तर और हिमालयाई राज्‍यों (अधिकतम 150 रूपये प्रति क्विंटल की शर्त पर) के अलावा 75 रूपये क्विंटल से ढुलाई कर में संशोधन किया गया है।

 

प्रबंधन निगरानी और आंकलन (एमएमई) दर को संशोधित करके कुल ग्राह्य पुनरावर्ती केन्‍द्रीय सहायता का 2 प्रतिशत से बढ़ाकर 3 प्रतिशत किया गया है।

 

रसोई उपकरणों के लिए सहायता को छात्रों की संख्‍या के आधार पर 5,000 रूपये की निश्चित दर से बढ़ाकर 10 हजार से 25 हजार रूपये किया गया है। इससे स्‍कूल, रसोई उपकरणों की खरीदारी / बदलाव करने में समर्थहोंगे।

 

10 वर्ष से अधिक पुराने रसोई घरों की मरम्‍मत के लिए 10 हजार रूपये प्रति रसोई का नया घटक शुरू किया गया है इससे मरम्‍मत और रख-रखाव में मदद मिलेगी।

 

एक व्‍यवस्थित तरीके से खाद्य वस्‍तुओं की मजबूती के लिए 50 करोड़ रूपये आवंटित किये गये हैं इससे एनीमिया और अन्‍य सूक्ष्‍म पोषक तत्‍वों की कमी की समस्‍याओं से निपटा जा सकेगा। स्‍कूलों में किचन गार्डनोंको प्रोत्‍साहित किया जाएगा।

 

जिला मजिस्‍ट्रेट की अध्‍यक्षता में जिला स्‍तर समिति को मौजूदा दिशा निर्देशों (केन्‍द्र और राज्‍य सरकार) में छोटे मोटे बदलाव के साथ योजना लागू करने का अधिकार सौंपा गया है। इससे स्‍थानीय जरूरतों के मुताबिक योजना की बेहतर आपूर्ति में मदद मिलेगी।

 

राज्‍य और केन्‍द्र शासित प्रदेशों को मानव संसाधन विकास मंत्रालय की पूर्व अनुमति से अपनी वार्षिक कार्य योजना और बजट का 5 प्रतिशत नए हस्‍तक्षेपों में उपयोग करने का अधिकार दिया गया है। इससे राज्‍यों औरकेन्‍द्र शासित प्रदेशों को नवाचारी गतिविधियां शुरू करने में मदद मिलेगी।

 

तिथि भोजन के रूप में समुदाय भागीदारी की अवधारणा को प्रोत्‍साहित किया जाएगा जिसके तहत समुदाय लोग बच्‍चों के जन्‍म दिन, विवाह जैसे मुख्‍य दिवसों का आयोजन करते हैं। इसके लिए मिड-डे-मील योजना में योगदान करना होगा। तिथि भोजन मिड-डे-मील का विकल्‍प नहीं है लेकिन यह मिड-डे-मील का पूरक है।

 

ब्‍लॉक, जिला और राज्‍य स्‍तरों पर खाना पकाने की प्रतियोगिताएं नवाचारी मीनू को बढ़ावा देने के लिए आयोजित की जाएंगी।

 

बफर स्‍टॉफ से दालों का उपयोग - राज्‍य और केन्‍द्र शासित प्रदेश भारत सरकार द्वारा बनाये गये केन्‍द्रीय बफर स्‍टाफ से अपने स्‍वाद के अनुसार मिड-डे-मील के लिए दाल खरीद सकते हैं।

 

उपस्थिति की निगरानी – मानव संसाधन विकास मंत्रालय ने प्रौद्योगिकी आधारित (एसएमएस, आईवीआरएस और मोबाइल एप्‍प) ओटोमेटिड मॉनिटरिंग सिस्‍टम लागू करने के लिए राज्‍यों और केन्‍द्र शासित प्रदेशों के साथ कार्य किया है। जिसके दौरान स्‍कूलों से मिड-डे-मील में उपस्थिति की जानकारी एकत्रित की जाती है। वर्तमान में रोजाना डाटा अपलोडिंग का स्‍तर सभी स्‍कूलों के लिए 56 प्रतिशत तक पहुंच गया है।

 

मिड-डे-मील के लिए जेलो, मंदिरों और गुरूद्वारों आदि का उपयोग – सभी राज्‍यों और केन्‍द्र शासित प्रदेशों को समुदाय और अन्‍य एजेंसियों जैसे जेल, मंदिर, गुरूद्वारों आदि को मिड-डे-मील योजना में शामिल करने कीसलाह दी गई है।

पृष्‍ठभूमि –

मिड-डे-मील योजना (एमडीएमएस) केन्‍द्र द्वारा प्रायोजित योजना है जिसमें सरकार, सरकारी सहायता प्राप्‍त स्‍कूलों के पहली कक्षा से 8वीं कक्षा में अध्‍ययन करने वाले सभी स्‍कूली बच्‍चें शामिल हैं। इस योजना में देश के 11.4 लाख स्‍कूलों में अध्‍ययन कर रहे 12 करोड़ से ज्‍यादा बच्‍चे शामिल हैं। भारत सरकार इस योजना में खाद्यानों पर लगभग 7,600 करोड़ की सब्सिडी सहित 17,600 करोड़ रूपये से अधिक का खर्च वहन करती है। केन्‍द्र सरकार द्वारा प्रति खुराक वहन की जाने वाली औसत लागत प्राथमिक और अपर प्राथमिक कक्षाओं के लिए क्रमश: 6.64 रूपये और 9.59 रूपये है।

 

The Cabinet Committee on Economic Affairs chaired by the Prime Minister has approved the revision of norms under Mid Day Meal Scheme with an outlay of Rs.12,054 Crore for 2019-20 in addition to the subsidy of about Rs. 8,000 crore borne by Department of Food & Public Distribution. The following revised norms and inclusion of new components would improve the efficiency and effectiveness of the scheme:

  • An annual increase in Cooking cost linked to the Inflation Index. This year Cooking cost is enhanced to Rs. 4.35 and Rs. 6.51 per child per school day, thus Cooking cost is enhanced by Rs 361 crore. This will offset the impact of inflation on the food items under Mid Day Meal Scheme.

  • Revision of the transportation rate from Rs 75 per quintal, for other than NE & Himalayan States to PDS rate (subject to a maximum of Rs.150 per quintal).

  • Revision of Management. Monitoring and Evaluation (MME) rate from 2% to 3% of the total admissible recurring Central Assistance. This would enable the States and UTs for better supervision and monitoring of the scheme,

  • The assistance for kitchen devices has been enhanced from a flat rate of Rs 5,000 per school to Rs 10,000 - Rs 25,000 based on enrolment. This would enable the schools for procuring/replacing adequate kitchen devices.

  • A new component of Rs 10,000 per kitchen for repair of more than 10-year-old kitchen has been introduced. This will help in their maintenance and upkeep.

  • Rs 50 crore have been allocated for the fortification of food items in a systematic manner. This will address the problems of anaemia and other micronutrient deficiencies. Kitchen gardens in schools will also be encouraged.

  • The delegation of power of implementing the scheme with minor modifications from the existing guidelines (i.e Central / State Govt.) to District Level Committee Chaired by the District Magistrate. This will facilitate better delivery of the scheme suitable to local needs.

  • The States and UTs have been given the flexibility to utilize, with the prior approval of MHRD, 5% of their Annual Work Plan & Budget for new interventions. This will help the States and UTs in undertaking innovative activities.

  • The concept of community participation in the form of Tithi Bhojan will be encouraged under which people from the community celebrate important days such as childbirth, marriage, birthdays etc. by contributing to the Mid Day Meal Scheme. Tithi Bhojan is not a substitute to Mid Day Meal but it supplements or compliments Mid DayMeal.

  • Cooking competitions at Block, District and State levels will be organised to promote innovative menus.

  • Use of Pulses from buffer stock -The States and UTs may procure pulses as per their local taste for the Mid-Day Meal from the Central buffer stock created by the Government of India.

  • Monitoring of attendance - The Ministry of HRD has worked with States and UTs to implement a technology-based (SMS, IVRS & Mobile App) Automated Monitoring System by which information on attendance at the Mid Day Meal is collected every day from schools. At present, the level of daily uploading of data has reached 56% of all schools.

  • Usage of Jails, Temples, Gurudwaras etc, for Mid Day Meal - All States and UTs are being advised to involve the community and other agencies such as Jails, Temples, Gurudwaras etc. in the Mid Day Meal Scheme.

Background:

Mid-Day Meal Scheme (MDMS), is a Centrally-Sponsored Scheme which covers all school children studying in Classes I-VIII of Government, Government-Aided Schools. The scheme covers more than 12 crore children studying in 11.4 lakh schools across the country.

The government of India incurs more than Rs 17,600 crore in the scheme including the subsidy of about Rs.7,600 crore on food grains.

The average per meal cost borne by the Central Government is Rs 6.64 and Rs. 9.59 for students of primary and upper primary classes, respectively.

Courtesy – Press Information Bureau, Government of India​